Mahadevi Varma का Google Doodle: कुछ इस अंदाज़ में याद की गईं 'आधुनिक मीरा'

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Mahadevi Varma का Google Doodle: कुछ इस अंदाज़ में याद की गईं 'आधुनिक मीरा'

Mahadevi Varma का Google Doodle

ख़ास बातें

  • Mahadevi Varma के Doodle को गेस्ट कलाकार सोनाली जोहरा ने किया तैयार
  • Mahadevi Varma का योगदान सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं है
  • उनकी शादी महज नौ साल की उम्र में 1916 में हो गई थी
महान कवयित्री महादेवी वर्मा को कौन नहीं जानता। गूगल ने आज अपने डूडल को हिंदी साहित्य की स्तंभ माने जाने वाली कवयित्री महादेवी वर्मा को समर्पित किया है। Celebrating Mahadevi Varma शीर्षक वाले Google Doodle में महादेवी वर्मा (Mahadevi Varma) कुछ लिखते हुए नज़र आ रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मानों वो कोई नई रचना कर रही हों। Mahadevi Varma को समर्पित इस Google Doodle में बैकग्राउंड में गांव के बैकड्रॉप का इस्तेमाल हुआ है।

हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ थे। इनमें से एक महादेवी वर्मा भी थीं। उन्हें 'आधुनिक मीरा' के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था। हिंदी और संस्कृत, उनकी परवरिश का हिस्सा रहे। Mahadevi Varma का योगदान सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं है। वो महिलाओं के अधिकार के लिए भी लड़ीं।

Mahadevi Varma के Google Doodle को गेस्ट कलाकार सोनाली जोहरा ने तैयार किया है। डूडल में महादेवी वर्मा पेड़ की छांव में कुछ लिखते हुए नजर आ रही हैं। महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फरुखाबाद में एक रुढ़िवादी परिवार में हुआ था। उनकी शादी महज नौ साल की उम्र में 1916 में हो गई थी। वह शादी के बाद अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए अपने घर में ही रहीं।

गूगल के मुताबिक, महादेवी वर्मा को लेखक बनने के लिए प्रोत्सहन उनकी मां की ओर से मिला। उनकी मां ने ही महादेवी को संस्कृत और हिंदी में लिखने को प्रोत्साहित किया।

गूगल ब्लॉग के मुताबिक, महादेवी वर्मा को हिंदी साहित्य में छायावाद आंदोलन के आधारभूत कवियों में से एक माना जाता है। उनकी अधिकतर कविताएं और निबंध नारीवादी दृष्टिकोण पर केंद्रित होते हैं। महादेवी वर्मा की आत्मकथा 'मेरे बचपन के दिन' ने उस समय के बारे में लिखा है, जब एक लड़की को परिवार पर बोझ समझा जाता था।

महादेवी वर्मा को 1956 में पद्मभूषण, 1979 में साहित्य अकादमी फैलोशिप और 1988 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया गया। उनका 11 सितंबर 1987 को निधन हो गया था।
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