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उबर इंडिया की दो नई सर्विस के पीछे आपकी सुविधा सर्वोपरि

सहूलियत सर्वोपरि है। कैब सर्विस उबर इसी मकसद के साथ भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। कंपनी का मानना है कि राइडर के लिए सफ़र सुहाना हो, और इसके लिए वो सारी ज़रूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

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उबर इंडिया की दो नई सर्विस के पीछे आपकी सुविधा सर्वोपरि
सहूलियत सर्वोपरि है। कैब सर्विस उबर इसी मकसद के साथ भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। कंपनी का मानना है कि राइडर के लिए सफ़र सुहाना हो, और इसके लिए वो सारी ज़रूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हाल के दिनों में कंपनी ने भारत में दो नई सेवाओं शुरुआत की। 'डायल एन उबर' को ख़ास भारत के लिए लॉन्च किया गया है, जबकि कुछ देशों के पहले ही आजमाए जा चुके 'रिक्वेस्ट ए राइड फोर अदर्स' सर्विस को भी मार्केट में उतारा गया है।

'डायल एन उबर' सेवा की शुरुआत नागपुर, कोच्चि, गुवाहाटी और जोधपुर से की गई है। इस पायलेट प्रोजेक्ट के लिए चुने गए शहर कंपनी की 'इंडिया से भारत' की ओर बदलती रणनीति की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, उबर ऐसा नहीं मानती।

उबर इंडिया की प्रवक्ता ने हमें बताया कि शहरों के चुनाव में कोई ख़ास रणनीति नहीं अपनाई गई है। हमने अपनी नई सेवाओं के बारे में शहरों के हिसाब से नहीं सोचा है। हमारा मकसद है कि चाहे कोई भी नई सर्विस हो उसे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए। चाहे यूज़र बड़े शहर के हों या फिर छोटे शहरों के। लक्ष्य यही है कि राइडर बिना किसी परेशानी के इन सेवाओं को इस्तेमाल कर सकें।

उबर ने अपनी बात रखने के लिए नई सर्विस 'बुक ए राइड फॉर अदर्स' का भी ज़िक्र किया। कंपनी की प्रतिनिधि ने गैजेट्स 360 से कहा, "कई बार हम अपने माता-पिता के फोन में उबर ऐप तो डाल देते हैं लेकिन वे इस्तेमाल करने से झिझकते हैं। ऐसे में परिजन आपसे ही कैब बुक करने को कहते हैं। पहले भी हम और आप अपने ऐप के जरिए किसी और शख्स के लिए कैब बुक कर पाते थे। लेकिन इसकी प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है। ड्राइवर को कॉल करो, लोकेशन बताओ और फिर परिवार वालों को कॉल करके ड्राइवर और कैब नंबर की जानकारी दो। एक पल के लिए सोचें तो इस पूरी प्रक्रिया के साथ कैब सर्विस इस्तेमाल करना परेशानी का सबब बन जाता है। इन चीजों को हमने ध्यान में रखते हुए 'बुक ए राइड फॉर अदर्स' सर्विस निकालने का फैसला किया।'

'बुक ए राइड फॉर अदर्स' सर्विस ऐसे करें इस्तेमाल
इस फ़ीचर को इस्तेमाल करने के लिए यूज़र को अपने स्मार्टफोन पर लेटेस्ट उबर ऐप इंस्टॉल करना होगा। पिकअप प्वाइंट को पिन कोड डालकर सेटअप किया जा सकता है, या मैनुअली पिकअप लोकेशन भी डाला जा सकता है। इसके बाद उबर यूज़र को बताना होगा कि यह राइड किसके लिए है। इसकी जानकारी गाड़ी इस्तेमाल करने वाले शख्स का कॉन्टेक्ट फोनबुक से चुनकर दिया जा सकता है, या फिर फोन नंबर टाइप करने से भी काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद उबर यूज़र पेमेंट का तरीका भी तय कर सकते हैं। यात्रा राशि का भुगतान राइड का फायदा उठाने वाला शख्स नकद में कर सकता है, या इसका भुगतान उबर यूज़र इलेक्ट्रॉनिक तरीकों से भी कर सकते हैं।
 
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राइडर को इसके बाद दो एसएमएस मिलेंगे। एक में ड्राइवर और उसकी कार का सारा ब्योरा मौजूद रहेगा व दूसरे में राइड को ट्रैक करने का लिंक। दूसरी तरफ, ड्राइवर को राइडर का फोन नंबर मिल जाएगा ताकि पिकअप को कॉर्डिनेट किया जा सके। उबर यूज़र पूरे सफर पर ऐप के जरिए नज़र रख सकते हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि सहूलियत के मकसद से ही कंपनी ने 'डायल एन उबर' सर्विस की भी शुरुआत की है। कई बार ऐसा होता है कि आपके फोन पर उबर ऐप नहीं है, या फिर इलाके में इंटरनेट कनेक्टिविटी उतनी अच्छी नहीं है। ऐसे में फोन के ब्राउज़र में उबर की वेबसाइट पर जाकर कैब बुक की जा सकती है। साफ कर दें कि डायल एन उबर सर्विस के लिए भी इंटरनेट की ज़रूरत पड़ेगी। लेकिन कंपनी को लगता है कि आम चलन में कई यूज़र ऐप के बजाय ब्राउज़र इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते हैं।

ऐसे इस्तेमाल करें डायल एन उबर
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आपको अपने मोबाइल फोन ब्राउज़र में dial.uber.com पर जाना होगा। यहां पर आप लॉगइन या साइन-अप करने के लिए अपने नंबर का इस्तेमाल करें। इसके बाद आप आपको कैब सर्विस की कीमत और अनुमानित किराया पता चल जाएगा। अब आप टैप करके अपने के लिए राइड बुक कर सकते हैं। कैब के लिए रिक्वेस्ट देने के बाद राइडर को सीधे ड्राइवर से कनेक्ट कर दिया जाएगा, ताकि पिकअप प्वाइंट को लेकर कॉर्डिनेट किया जा सके। यात्रा खत्म होने के बाद पेमेंट कैश में करना होगा।

आपको बता दें कि डायल एन उबर में फिलहाल उबर गो कैब को ही शामिल किया गया है। इसके बारे में उबर ने बताया कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। यह अभी चार शहरों तक सीमित है और यात्रा के लिए भुगतान भी सिर्फ नकद में संभव है। पायलेट प्रोजेक्ट होने के कारण कुछ सुविधाएं सीमित रखी गई हैं।  

डायल एन उबर के भविष्य के बारे में कंपनी ने कहा, 'अगर यह प्रोजेक्ट लोकप्रिय होता है तो कंपनी भविष्य में इसे अन्य शहरों में भी लाएगी। इसके अलावा भुगतान के अन्य विकल्प भी दिए जाएंगे। उबर एक्स और उबर प्राइम जैसी सेवाओं को लाने पर भी विचार किया जाएगा। लेकिन यह पूरी तरह से यूज़र और ड्राइवर के फीडबैक पर निर्भर करेगा।'

अब सवाल उठता है कि क्या 'बुक ए राइड फॉर अदर्स' जैसी सेवा शुरू करने के पीछे सुरक्षा भी अहम कारण था? इस पर उबर ने कहा कि राइडर की सिक्योरिटी और सेफ्टी को हमने हमेशा अहमियत दी है। लेकिन इस सेवा की पीछे सहूलियत प्राथमिक वजह थी। वैसे, आज के परिदृश्य में  सुरक्षा के लिहाज से एहतियात बरतने में कुछ भी गलत नहीं है। कंपनी हमेशा चाहती है कि उबर के पास यात्रा के दौरान राइडर का पूरा ब्योरा मौजूद रहे, ताकि आपातकालीन परिस्थिति में मदद मुहैया कराने में दिक्कत ना हो।

मज़ेदार बात यह है कि इन सेवाओं को शुरू करने के पीछे यूज़र फीडबैक ने अहम भूमिका निभाई है। और इनका भविष्य भी फीडबैक पर ही निर्भर करेगा।
 
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संदीप कुमार सिन्हा तकनीकी तौर पर टेक्नोलॉजी की दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं। और भी »
 
 

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